मुगलकाल में जो महिलाओं की स्थिति थी वही ब्रिटिष शासन काल मंे बनी रही। इस समय भी बाल विवाह, बहु विवाह, दहेज प्रथा, विधवा विवाह निषेध एवं सती प्रथा इत्यादि कुरीतियाँ समाज मंे जमी हुई थी। धर्म की नीतियों और सिद्धान्तो ने पहले से ही महिला के पैरों में बेड़ियाँ लगा रखी थी। देष के आर्थिक विकास की डोर ब्रिटिष सत्ता के हाथ में थी। ऐसे में महिला समाज तो पहले से ही पुरूष पर निर्भर था तो वह उन्नति कैसे कर सकता था। मुगलकाल की सतायी महिला घर की चारदीवारी में अपने जीवन की त्रासदी अभी भी भोग रही थी। वह सारे अधिकारों से वंचित होकर पुरूष प्रधान की भोग्या बन कर रह गई थी। भारतीय इतिहास में 18वीं सदी का समय घोर अवनति और अघोगति का समय था। अंग्रेजी शासन व्यवस्था दिनों-दिन अपनी सत्ता बढ़ाती जा रही थी।
Article DOI: 10.62823/IJAER/2025/01/04.125