यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों का जयपुर पर्यटन पर प्रभाव

Author: चंचल गुप्ता एवं डॉ. पूर्णिमा मिश्रा (Chanchal Gupta & Dr. Poornima Mishra)

जयपुर शहर अपनी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं स्थापत्य कला की विशेषताओं के साथ संपूर्ण भारत ही नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व में पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है। इसे वर्ष 2019 में यूनेस्को द्वारा ‘‘विश्व धरोहर शहर’’ का दर्जा प्रदान किया गया। इससे पहले भी जयपुर की बहुत सारी ऐतिहासिक धरोहरें, जैसे जंतर-मंतर, आमेर किला तथा सिटी पैलेस क्षेत्र, विश्व धरोहर सूची में सम्मिलित की जा चुकी थीं। इन स्थलों ने न केवल जयपुर की पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित कर दिया, बल्कि स्थानीय पर्यटन उद्योग, आर्थिक विकास तथा सांस्कृतिक संरक्षण में भी महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स वद जीम जवनतपेउ व िजयपुर. इसमें यह समझाया है कि इन धरोहर स्थलों द्वारा देशी-विदेशी पर्यटकों का कैसे आकर्षण हुआ, स्थानीय अर्थव्यवस्था को कैसे मजबूत बनाया गया तथा रोजगार के कितने नए अवसर बनाए गए। इसके अतिरिक्त यह भी देखा है कि इन स्थलों के संरक्षण एवं प्रबंधन में किन-किन मुश्कलताओं का समन्वाय करना पड़ता है, जैसे कि अत्यधिक पर्यटक दबाव, अवसंरचना की कमी, प्रदूषण एवं स्थानीय समुदाय की सहभागिता का अभाव। विश्व धरोहर स्थलों के लिए अ/ययन से यह स्पष्ट हुआ कि जयपुर की विश्व धरोहर स्थलें न केवल ऐतिहासिक धरोहर के रूप में संरक्षित हैं, बल्कि ये शहर की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी हैं। इनसे पर्यटन राजस्व में वृद्धि हुई है, होटल एवं परिवहन उद्योग को गति मिली है तथा हस्तशिल्प और स्थानीय कला को वैश्विक पहचान प्राप्त हुई है। साथ ही, यह भी पाया गया कि यदि इन स्थलों का संरक्षण योजनाबद्ध तरीके से किया जाए तथा पर्यटक प्रबंधन की सुदृढ़ नीतियाँ अपनाई जाएँ, तो जयपुर पर्यटन को और अधिक स्थायी एवं समावेशी बनाया जा सकता है। अतः यह निष्कर्ष निकलता है कि जयपुर की वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स ने पर्यटन विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, किंतु इनके संरक्षण और प्रबंधन हेतु सरकार, स्थानीय समुदाय और निजी क्षेत्र को मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है, जिससे यह धरोहरें आने वाली पीढ़ियों तक संरक्षित रह सकें और पर्यटन विकास का लाभ व्यापक स्तर पर समाज को प्राप्त हो सके।

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