आधुनिक भारत में प्रथम शिक्षा नीति के जनक एशिया महादेश के विशालतम विद्या केन्द्र काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्थापक एंव आदर्श कुलपति, शिक्षा द्वारा देश में कृषक, वैज्ञानिक एंव औद्योगिक क्रांति का सूत्रपात करने वाले युग पुरूष महान शिक्षाविद, प्रांतीय असेंम्बली एंव केन्द्रीय कौंसिल में लगातार 30 वर्षों तक जनता की आवाज को बुलन्द करने वाले भारतीय राजनीति के शिखर पुरूष, स्वतन्त्रता संग्राम को गति एंव परिणति देने वाले भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के पितामह, भारतीय सांस्कृतिक नवजागरण और स्वदेशी एंव हिन्दी आंदोलनों के अग्रवर्ती प्रवर्तक मार्ग दर्शक, मंत्रदीक्षा के अभिनव क्रांतिकारी प्रयोग द्वारा लाखेंा अछूतों को विधर्मी होने से बचाने वाले तथा इन्हें शैक्षिक सामाजिक विचार धारा से जोड़ने वाले महान समाज सुधारक हिन्दुत्व के उत्थान एवं आजीवन हिन्दु मुस्लिम एकता के लिये संधर्ष करने वाले राष्ट्रवादी देश भक्त, चौरी चौरा काण्ड के 156 अभियुक्तों को फाँसी की सजा से बचाने वाले प्रभावशाली अधिवक्ता पत्रकारिता के क्षेत्र में नवीन एंव मौलिक सिद्धान्तों के प्रणेता, चिंतक पत्रकार सिल्वर टंग आरेटंर के क्षेत्र में विख्यात महानतम वाग्मी, शिक्षा जगत के महानतम फकीर प्रिंस ऑफ वेगर्स और नवजागरण, नवनिर्माण के आधुनिक काल खण्ड में लगभग 60 वर्षों के जीवित इतिहास माने जाने वाले युगद्रष्टा युग निर्माता, श्रृषि समन्वयवादी विचारक एंव मानवतावादी धर्म प्रवक्ता महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी ने सदियांे की गुलामी और शोषण से जर्जर भारत की काया में पुन: नई चेतना व उर्जा का संचार कर उसे साहस शौर्य स्वाभिमान के साथ जीने योग्य बनाने में जिस अनथक एंव समर्पित भाव से लगातार 70 वर्षों तक त्याग व संघर्ष किया वह युगों तक अद्वितीय मिशाल है। महामना का व्यक्तित्व बहु आयामी था। उनके कार्य बहुरूप एंव देशव्यापी थे। जिन्हें शब्दों में बता पाना संभव नहीं, उनके सिर्फ कुछ प्रमुख कार्य अवदानों पर प्रकाश डाला जा रहा है। जिनमें उनकी महान सेवाओं तथा उनके त्याग, तप, की उँचाइयों की एक झलक मिलेगी।